भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने गगनयान के लिए विकसित ड्रोग पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण उस तकनीक से जुड़ा है जो अंतरिक्ष से लौटते समय भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करेगी।
यह सफलता केवल एक तकनीकी परीक्षण नहीं, बल्कि मिशन की विश्वसनीयता और सुरक्षा का अहम चरण है।
“इस लेख का स्रोत: पीआईबी“
ड्रोग पैराशूट क्यों है मिशन की सुरक्षा का अहम हिस्सा?
जब क्रू मॉड्यूल पृथ्वी के वायुमंडल में अत्यधिक गति से प्रवेश करता है, तब उसकी रफ्तार को नियंत्रित करना सबसे बड़ी चुनौती होती है।
ऐसी स्थिति में सबसे पहले ड्रोग पैराशूट खुलता है। इसका कार्य है:
- मॉड्यूल की गति कम करना
- उसे स्थिर करना
- मुख्य पैराशूट को सुरक्षित रूप से खोलने की स्थिति तैयार करना
यदि यह प्रणाली सटीक रूप से काम न करे तो लैंडिंग प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए इसका सफल परीक्षण मिशन की सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है।
गगनयानड्रोग पैराशूट सिस्टम परीक्षण में क्या रहा खास?
- परीक्षण को वास्तविक अवतरण (re-entry) परिस्थितियों के अनुरूप डिजाइन किया गया।
- पैराशूट सिस्टम ने निर्धारित प्रदर्शन मानकों को पूरा किया।
- मॉड्यूल की स्थिरता और नियंत्रित अवरोह (descent) की पुष्टि हुई।
यह परीक्षण गगनयान के रिकवरी मैकेनिज्म को मजबूत करता है और अंतिम वापसी चरण को तकनीकी रूप से अधिक विश्वसनीय बनाता है।
गगनयान मिशन: भारत की अंतरिक्ष क्षमता का अगला कदम
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा संचालित गगनयान मिशन का उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और सुरक्षित वापस लाना है।
इस मिशन के सफल होने पर भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा जिन्होंने स्वदेशी तकनीक के माध्यम से मानव अंतरिक्ष उड़ान को संभव किया है।
और पढ़ें: Agni 3 Launch Success: DRDO द्वारा अग्नि-3 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण
यह उपलब्धि क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है?
- मानव सुरक्षा तंत्र का महत्वपूर्ण चरण सफल
- स्वदेशी एयरोस्पेस तकनीक को मजबूती
- मिशन की विश्वसनीयता में वृद्धि
- अंतरिक्ष कार्यक्रम की वैश्विक साख मजबूत
गगनयान केवल अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन है।
आगे क्या?
आगामी चरणों में क्रू मॉड्यूल, जीवन समर्थन प्रणाली और अन्य सुरक्षा प्रणालियों के परीक्षण जारी रहेंगे। ड्रोग पैराशूट परीक्षण की सफलता से यह संकेत मिलता है कि मिशन की सुरक्षित वापसी की तैयारी व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ रही है।
और पढ़ें: ISRO PSLV-C62 : Why the Mission Failed
FAQ: गगनयान ड्रोग पैराशूट परीक्षण से जुड़े प्रश्न
1. ड्रोग पैराशूट क्या होता है?
यह एक छोटा पैराशूट सिस्टम है जो उच्च गति से नीचे आते क्रू मॉड्यूल को स्थिर और धीमा करने के लिए उपयोग किया जाता है।
2. इसका परीक्षण किसने किया?
यह परीक्षण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा किया गया।
3. गगनयान मिशन का संचालन कौन कर रहा है?
गगनयान मिशन का संचालन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) कर रहा है।
4. यह परीक्षण क्यों आवश्यक था?
क्योंकि सुरक्षित लैंडिंग के लिए मॉड्यूल की गति और स्थिरता नियंत्रित करना अनिवार्य है।
5. इस सफलता का मिशन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इससे मिशन की सुरक्षा विश्वसनीयता मजबूत होती है और मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी एक कदम आगे बढ़ती है।
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